वजन बढ़ने और कम होने का विज्ञान – Weight Loss and weight gain Science in Hindi

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वजन बढ़ने और कम होने का विज्ञान
किसी भी चीज़ का सोलुशन तब ही निकाला जा सकता हैं, जब हमे प्राब्लम का कारण पता हो. वजन कम(Weight Loss) करने के लिए भी हमे पहले पता होना चाहिए की वजन बढ़ा क्यूँ और क्यूँ यह लगातार बढ़ रहा है और जब वजन बढ़ने(Weight Gain) का कारण पता चलेगा, हम उन कारणों का समाधान करेंगे.
हम सभी ने कैलोरी का नाम सुना होगा, एनर्जी को कैलोरी मैं नापा जाता हैं. हमारे शरीर को कैलोरीज की जरूरत होती हैं, शारारिक और मानसिक काम करने के लियें . कैलोरीज हमें खाने और पीने से मिलती है. अगर हम अपने शरीर की जरूरत से ज़्यादा कैलोरीज लेंगे तो यॅ एक्सट्रा कैलोरीज, फैट(Fat) बनकर हमारे शरीर मैं जमा होने लगती हैं. और लगातार ऐसा होने से फैट बढ़ता ही जाता हैं और हम मोटे होने लगते हैं.
अब मोटापा कम करने के लिए हमें इसका उल्टा काम करना होता हैं. हमें हमारे शरीर की जरूरत से कम कैलोरीज लेनी होती हैं. अब आप कहेंगे, इससे तो हमें जितनी एनर्जी चाहिएं, उससे कम एनर्जी ही मिलेगी और हमारा शरीर दिन भर काम नही कर पाएगा.

 

सबसे अच्छी बात हैं की भगवान ने हमारे शरीर को बनाया ही इस तरह से हैं. जब शरीर मैं एनर्जी कम होने लगती हैं, तो हमारा शरीर इस जमा हुए फैट(Fat) का इस्तेमाल करता हैं और एनर्जी बनाता हैं. इसे ही फैट बर्निंग कहतें हैं.

 

चलिए अब साधारण भाषा में इसी को विज्ञान(Science) नजरियें से देखतें हैं, देखतें हैं, की असल मैं हमारे शरीर मैं होता क्या हैं.

 

Weight Loss Journey

फैट क्या होता हैं और ये क्यूँ बढ़ता हैं

जब हम खाना खाते हैं, खाना डाइजेस्ट होकर एक प्रकार का शुगर बनता हैं, जिसे हम ग्लूकोस कहतें हैं. यह ग्लूकोस हमारे ब्लड मैं होता हैं. जब ग्लूकोस ब्लड मैं होता हैं, तो हमारी पॅनक्रियास (अग्नाष्या) इंसुलिन हार्मोन छोड़ती हैं और यह इंसुलिन एक गेटकीपर का काम करता हैं और उस ग्लूकोस को मसल सेल्स मैं जमा करता हैं(जिसे ग्लाइकजेन कहतें हैं), यह ग्लूकोस हमारी मांसपेशियों को और पुरें शरीर को एनर्जी देता हैं. लकिन इसकी भी जमा करने की एक सीमा हैं. इसी कारण बचा हुआ ग्लूकोस फैट एसिड(Fat acid) के साथ हमारे फैट सेल्स(Fat cells) मैं जमा हो जाता हैं. फैट सेल्स हम सभी के शरीर मैं स्किन के नीचे होती हैं, चाहे वो पतला हो या मोटा.

 

फैट कैसे कम हैं

जब हम कुछ देर खाना नही खाते , हमारे शरीर मैं ग्लूकोस की मात्रा ख़तम हो जाती हैं. तब इंसुलिन की मात्रा भी ख़तम हो जाती हैं. अब हमारे शरीर की एनर्जी बनाने के लिए और ग्लूकोस की जरुरत पड़ती हैं, यह दो तरह से आ सकती हैं, वापस से खाना खाकर, और जब ऐसा नही होता, तब हमारा शरीर फैट एसिड का उपयोग करता हैं, और यहीं हमारे शरीर मैं ब्लड मैं जाकर एनर्जी बनाता हैं.
इस तरह से यह जमा हुआ फैट(Fat) वापस कम हो जाता हैं. यह एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया हैं. इसी लिए हम पूरी रात बिना खाना खाएँ रह पातें हैं और उठाने के बाद भी हमारे शरीर मैं काफ़ी एनर्जी रहती हैं.
अब अगर हम ज़्यादा खाना खाने लग जाएँ, तो ब्लड मैं ग्लूकोस की मात्रा हमेशा ज़्यादा रहेगी, इससे इंसुलिन उस ग्लूकोस को मसल सेल मैं जमा करता ही जाएगा, जब मसल सेल्स की सीमा पूरी हो जाएगी, बचा हुआ सारा ग्लूकोस फट सेल्स मैं जमा होने लगेगा, और उससे ज़्यादा खाने ग्लूकोस और इंसुलिन की मात्रा कभी कम नही होगी और फट सेल्स बढ़तें ही जाएँगे. और इससे हम धीरेन धीरेन जायेंगे.
तो इससे हमे पता चला की हमारे शरीर को जितनी जरुरत हैं, उससे ज़्यादा खाने से फैट जमा होता हैं.

फैट कम करने के 2 उपाय

  1. व्यायाम (एक्सर्साइज़) – एक्सर्साइज़ करने से हमारी मसल्स मैं जमा एनर्जी (ग्लाइकजेन) कम हो जाता हैं, जिससे हमारी मसल्स सेल्स , फिर से ब्लड से ज़्यादा ग्लूकोस जमा करती है. जिससे हमारी फैट सेल्स मैं कम ग्लूकोस ( फैट एसिड ) जमा होता हैं. और हम और मोटे नही होते
  2. कम खाना खाना – अगर हम कम खाना खाएँगे, तो हमारे ब्लड मैं कम ग्लूकोस बनेगा और इस कमी को फैट सेल्स पूरा करेंगी. जिससे हुमारा फैट ज़्यादा बर्न होगा. जिससे हुमारा वजन कम होगा.

 

अब प्रशन यह हैं की खाने मैं कौनसा तत्व हैं जो फट बढ़ता हैं?
हमारे खाने मैं मेन्ली 3 तत्व होते हैं. कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और फैट. और फैट के अलावा कारबोहाइड्रेट ही हमारे शरीर मैं ग्लूकोस की मात्रा को बढ़ता हैं. इसीलिए ज़्यादातर सभी लोग मोटापा कम करने के लिए लो कर्ब डाइट रखने की सलाह देते हैं. इस बारें में ज्यादा जानकारी यहां से देख सकतें हैं.
यह सभी कुछ मैने काफ़ी साधारणा शब्दो मैं बताया हैं और कम से कम बाइयोलॉजिकल नामों का प्रयोग किया हैं. जिससे मेरे जैसे एक आम इंसान को समझने मैं आसानी रहे.
वैसे फट बनने की कई थियरीस (Theories) हैं, कुछ साइंटिस्ट मानते हैं. फट बर्न होके एनर्जी नही बनती, फट बर्न होके CO2 (कार्बन डाई ऑक्साइड) और H2) (पानी) बनता हैं. CO2 हमारे शरीर से ब्रीदिंग के द्वारा बाहर निकलती हैं और H2O आपके पसीने से, यूरिन से, आंसुओं के साथ बाहर निकलता हैं.
हमारा शरीर ज़्यादा से ज़्यादा CO2 और H2O बाहर निकले, इसके लिए भी वहीं 2 तरीके हैं.

  1. ज़्यादा शारारिक काम करो.
  2. खाना कम खाओ

 

मतलब थियरी कोई भी हो, सभी weight loss थियरीस, मोटापा कम करने के 2 ही उपाय बतातें हैं, एक्सर्साइज़ और कम/पोष्टिक खाना खाना.

 

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NOTE - Friends, I am not dietitian or Doctor, I write information here on the basis of my own 25 kilo weight loss experience and sometimes from online research. Please take doctor advice before applying any tip, as each and every human body is different.

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